नवरात्री (नवरात्र) के पावन पर्व के दूसरे / दिन / दिवस माँ ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini) की पूजा-अर्चना, स्तुति की जाती है। ब्रह्म का अर्थ है तप अथवा तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini) का अर्थ हुआ तप या तपस्या का आचरण करने वाली। माँ ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। ब्रह्मचारिणी हिन्दू देवी हैं और माँ दुर्गा का स्वरुप हैं। इनके अस्त्र शस्त्र कमंडल और माला हैं। ब्रह्मचारिणी का वाहन उनके पैर हैं।

माँ दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। नवदुर्गा में ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini) का दूसरा स्थान है। इनकी आराधना से, उपासना से, स्तुति से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है और उसका जीवन एक तपस्वी की भाँती निर्मल बनता है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता।

माँ ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini) देवी की कृपा से साधक को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन इन्हीं के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में शिथिल होता है। स्वाधिष्ठान चक्र कुंडलिनी शक्ति का दूसरा चक्र होता है। स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में है जिसकी छ: पंखुरियां हैं। इसके जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है। इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा और भक्ति प्राप्त करता है। साधक नवरात्री पर्व के दूसरे दिन मूलाधार चक्र से स्वाधिष्ठान चक्र में प्रवेश करता है।

माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना के साथ इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन अभी शादी नहीं हुई है। इन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट किए जाते हैं।

ऐसा माना जाता है की मंगल ग्रह जो सभी प्रकार के सौभाग्य प्रदान करता है, देवी माँ ब्रह्मचारिणी के द्वारा ही संचालित होता है।

माँ ब्रह्मचारिणी की स्तुति का /उपासना का मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु | देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

प्रत्येक सर्वसाधारण मनुष्य के लिए माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन शुद्ध मन से इसका जाप करना चाहिए।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

इसका अर्थ है “जो देवी सभी जीव जंतुओं, प्राणियों, मनुष्यों आदि में ब्रह्मचारिणी के रूप में स्थित हैं उन्हें बार बार नमस्कार है”

मां ब्रह्मचारिणी की कथा

माँ पार्वती ने कुष्मांडा के स्वरुप के बाद दक्ष प्रजापति के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था। इस रूप में देवी पार्वती आगे चलकर माँ सती के रूप में प्रसिद्ध हुईं थीं, और उनका अविवाहित स्वरुप माँ ब्रह्मचारिणी के नाम से प्रख्यात हुआ।  नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए देवी माँ ने घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया। एक हजार वर्ष तक माँ ब्रह्मचारिणी ने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक सब्जी पर निर्वाह किया। माँ ब्रह्मचारिणी ने कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट भी सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। तीन हजार वर्ष के पश्चात् उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया।

कठिन तपस्या / तप के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, उसकी सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह आप के द्वारा ही संभव थी। आपकी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी आपको पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही आपके पिता आपको लेने आ रहे हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है।

Devanagari Name – ब्रह्मचारिणी

Favourite Flower – Jasmine (चमेली)

Mantra

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
Om Devi Brahmacharinyai Namah॥

Prarthana

दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
Dadhana Kara Padmabhyamakshamala Kamandalu।
Devi Prasidatu Mayi Brahmacharinyanuttama॥

Stuti

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Ya Devi Sarvabhuteshu Maa Brahmacharini Rupena Samsthita।
Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥

Dhyana

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालङ्कार भूषिताम्॥
परम वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
Vande Vanchhitalabhaya Chandrardhakritashekharam।
Japamala Kamandalu Dhara Brahmacharini Shubham॥
Gauravarna Swadhishthanasthita Dwitiya Durga Trinetram।
Dhawala Paridhana Brahmarupa Pushpalankara Bhushitam॥
Parama Vandana Pallavaradharam Kanta Kapola Pina।
Payodharam Kamaniya Lavanayam Smeramukhi Nimnanabhi Nitambanim॥

Stotra

तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।
ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
शङ्करप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।
शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
Tapashcharini Tvamhi Tapatraya Nivaranim।
Brahmarupadhara Brahmacharini Pranamamyaham॥
Shankarapriya Tvamhi Bhukti-Mukti Dayini।
Shantida Jnanada Brahmacharini Pranamamyaham॥

Kavacha

त्रिपुरा में हृदयम् पातु ललाटे पातु शङ्करभामिनी।
अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥
पञ्चदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे पातु महेश्वरी॥
षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो।
अङ्ग प्रत्यङ्ग सतत पातु ब्रह्मचारिणी।
Tripura Mein Hridayam Patu Lalate Patu Shankarabhamini।
Arpana Sadapatu Netro, Ardhari Cha Kapolo॥
Panchadashi Kanthe Patu Madhyadeshe Patu Maheshwari॥
Shodashi Sadapatu Nabho Griho Cha Padayo।
Anga Pratyanga Satata Patu Brahmacharini।

माँ दुर्गा के ९ रूप  – maa durga ke 9 roop (nine forms of maa durga)

Akhilesh Sharma

Akhilesh Sharma is a well known digital marketeer and SEO consultant. He is also having a vast experience of architecting and programming for eCommerce applications and payment gateway integrations.

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